धंधा नंबर 1: मोबाइल डॉक्टर बन जाओ – फटा फोन, मोटी कमाई
आज बच्चा-बूढ़ा सबके हाथ में फोन है। गिरते ही कांच चकनाचूर। यही मौका है।
शुरू करने में 40 से 60 हजार लगेंगे। 15 हजार का कवर-ग्लास का माल, 10 हजार के पेचकस-मशीन, 15 हजार दुकान का एडवांस, 10 हजार साइड में रखो।
अब कमाई सुनो: दिन में 4 लोगों का ग्लास बदला तो 1 पर 200 रु बचत × 4 = 800 रु। 10 चार्जर-कवर बेच दिए, 1 पर 50 रु × 10 = 500 रु। कोई बैटरी का काम आ गया 300 रु अलग। टोटल 1 दिन में 1600 रु जेब में।
महीने का जोड़: 1600 × 26 दिन = 41,600 रु। 5 हजार किराया गया तो भी 36,600 रु बच गए।
15 दिन में काम सीख जाओगे। निशातगंज में 500 रु में लड़के सिखा देते हैं।
धंधा नंबर 2: माँ के हाथ का खाना बेचो – टिफिन से तिजोरी भरो
हॉस्टल वाले, दुकान वाले, ड्राइवर – सब रोटी को तरसते हैं। 70 रु में घर जैसा खाना दे दो, लाइन लग जाएगी।
शुरू में 8 से 12 हजार लगेगा। 5 हजार के स्टील वाले डिब्बे 20 पीस, 3 हजार का पहले दिन का राशन। गैस-चूल्हा तो घर का ही है।
1 टिफिन का गणित: सब्जी 15 + आटा-चावल 10 + गैस 5 = 30 रु खर्चा। बेचा 70 रु में। 1 टिफिन पर 40 रु साफ बचत।
शुरू में 15 टिफिन बांधे तो 15 × 40 = 600 रु रोज। महीना हुआ 15,600 रु। 3 महीने में नाम हो गया, 40 टिफिन लगने लगे तो 40 × 40 × 26 = 41,600 रु महीना।
पहले मोहल्ले में 5 घर फ्री खिला दो। जुबान पर चढ़ गया तो ऑर्डर रुकेंगे नहीं।
धंधा नंबर 3: कन्नौज का इत्र, शीशी में भर के करोड़पति वाला फील
20 रु का माल 250 में बिकता है। इसी को कहते हैं असली धंधा।
25 से 35 हजार लगा के शुरू हो जाएगा। 15 हजार का 1 लीटर कच्चा इत्र कन्नौज से उठा लाओ। 5 हजार की 500 छोटी शीशी, 2 हजार स्टिकर, 3 हजार एक्स्ट्रा।
हिसाब लगाओ: 1 लीटर में 6ml वाली 166 शीशी बनेंगी। 1 शीशी का खर्चा पड़ा 100 रु। बेचोगे 250 रु में। 1 शीशी पर 150 रु बचत।
दिन में सिर्फ 8 शीशी बिकी तो 8 × 150 = 1200 रु रोज। महीना 31,200 रु। दुकान-दुकान माल देने लगे, 30 शीशी रोज निकली तो 1,17,000 रु महीना। चौंक गए ना?
बस बोर्ड लगा देना "असली कन्नौज का इत्र"। नाम ही काफी है बिकने के लिए।
धंधा नंबर 4: पुरानी साड़ी से नया नोट छापो
नई साड़ी 1000 की, वही 6 महीने पुरानी 200 में मिल जाए तो अम्मा-चाची सब ले लेंगी।
10 हजार में काम शुरू। 7 हजार में 50 पुरानी साड़ी कबाड़ी से, 2 हजार धुलाई-प्रेस, 1 हजार का ठेला।
1 साड़ी 140 में खरीदी + 20 धुलाई = 160 खर्चा। बेच दी 350 में। 1 पर 190 रु बचत।
दिन की 5 साड़ी भी निकली तो 5 × 190 = 950 रु रोज। महीना 24,700 रु।
संडे को नक्खास या बुध बाजार में ठेला लगा दो। औरतें खुद खींच के आएंगी।
धंधा नंबर 5: फोन चलाओ, पैसा बनाओ – रील से रोटी
इसमें 1 रुपया नहीं लगता। बस हिम्मत चाहिए कैमरे के सामने बोलने की।
यूट्यूब 1 लाख व्यू के 200 से 800 रु देता है। 10 लाख व्यू महीने में आ गए तो 2 हजार से 8 हजार रु घर बैठे।
पर असली खेल ये है: अपनी चाट की दुकान, सिलाई की दुकान, सब्जी की रील बनाओ। वीडियो चल गई तो ग्राहक टूट पड़ेंगे। दुकान की बिक्री 2 गुनी हो जाएगी।
गांव का लड़का खेत में खड़ा होके "जुगाड़" बताता है, महीने का 40 हजार छाप रहा है। पर याद रखना, पहले 100 वीडियो तक फूटी कौड़ी नहीं मिलेगी।
चौका देने वाली 3 बात जो कोई नहीं बताता:
पहले महीने में ऊपर वाला पैसा मत गिनना। धंधा जमने में 90 दिन लगते हैं। शुरू में आधा ही आएगा।
बैंक से कर्जा लेके धंधा शुरू किया तो समझो फंस गए। जितना जेब में है उतने से ही करो।
आज इत्र, कल टिफिन, परसों यूट्यूब – ऐसे भागोगे तो खाली हाथ रहोगे। 6 महीने एक ही चीज को पकड़ के बैठ जाओ।
अब बॉल तुम्हारे पाले में है भैया
सबसे ज्यादा पैसा उसी धंधे में है जिसे तुम बिना छुट्टी लिए 12 घंटे कर सको। मुझे मोबाइल वाला सूट करता है, हो सकता है तुम्हें टिफिन वाला।
बस ये बता दो: जेब में कितना माल है और हाथ में कौन सा हुनर है?
मैं अभी का अभी तुम्हारे लिए 1 दिन का पूरा खर्चा-पानी-नफा का हिसाब लिख के दे दूंगा। फिर मत कहना किसी ने बताया नहीं।
टिप्पणियाँ